यूनेस्को की एक रिपोर्ट में ‘भारत+कश्मीर’ लिखे जाने पर विवाद, भारत ने दर्ज कराया विरोध

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प्रेस की स्वतंत्रता पर बृहस्पतिवार को जारी की गई यूनेस्को की एक रिपोर्ट में देशों की लिस्ट में इंडिया+कश्मीर लिखे जाने पर विवाद हो गया। इसे लेकर रिपोर्ट की रिलीज देखने आए लोगों ने सवाल उठाया कि क्या ये रिपोर्ट कश्मीर के अस्तित्व को स्वीकारती है।

इससे यह सवाल उठ रहा हैं कि क्या वैश्विक संस्था कश्मीर का पृथक अस्तित्व मानती है। विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर यूनेस्को – आईएफजे की रिपोर्ट जारी की गयी जिसके बाद प्रश्नोत्तर सत्र में एक सवाल पूछा गया कि इसमें कश्मीर को भारत के साथ विशेष रूप से क्यों लिखा गया है , क्या वह कश्मीर का पृथक अस्तित्व मानते हैं ?

हालांकि यूनेस्को की ये रिपोर्ट तैयार करने वाली विंग द यूनेस्को-इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट (आईएफजे) के दक्षिण एशिया समन्वयक उज्जवल आचार्य ने इसे नकार दिया। उन्होंने कहा कि कश्मीर को दक्षिण एशिया के सबसे विस्फोटक क्षेत्रों में से एक होने के कारण स्पेशल फोकस के तौर पर अलग से दर्शाया गया है।

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वर्ल्‍ड प्रेस फ्रीडम डे के मौके पर यूनेस्को के कार्यालय में यूनेस्को इंटरनेशनल फ्रीडम ऑफ जर्नलिस्ट रिपोर्ट ‘कठोर नीति और साहस-दक्षिण एशिया प्रेस आजादी रिपोर्ट 2017-18’ जारी की गई। इस रिपोर्ट में भारत+ कश्मीर दिखाया गया है।

उज्ज्वल आचार्य ने कहा कि विरोध दर्ज कर लिया गया है और उसे संबंधित लोगों तक पहुंच दिया जाएगा। पिछले साल भी छत्तीसगढ़,  श्रीलंका, पाकिस्तान और नेपाल के कुछ हिस्सों को शामिल किया था, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रेस की स्वतंत्रता के मामले में अस्थिर थे।

उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की रिपोर्ट में 5-6 संघर्ष जोन थे , जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता , प्रेस की स्वतंत्रता के मामले में अस्थिर थे , और इस वर्ष कश्मीर पर खास ध्यान है। उन्होंने कहा , ‘‘ पिछले वर्ष हमने छत्तीसगढ़ , काबुल , श्रीलंका,  पाकिस्तान और नेपाल के कुछ हिस्सों को शामिल किया था। ” उन्होंने कहा कि विरोध दर्ज कर लिया गया है और उसे संबंधित लोगों तक पहुंच दिया जाएगा।

आपको बता दें कि, पहले भी कई बार मैप पर कश्‍मीर और POK को गलत दर्शाने पर विवाद उत्पन्‍न हो चुके हैं। वहीं पाकिस्‍तान ने नक्शे को लेकर भारत के नए कानून पर UN को चिट्ठी लिखी थी और श‍िकायत दर्ज करवाई थी। नए कानून के तहत नक्शा ग़लत दिखाने पर 100 करोड़ तक जुर्माना और 7 साल की जेल का प्रावधान है।

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