‘राष्ट्रीय वीरता पुरष्कार’ 18 बच्चों को, जानिए कैसे खुद मौत के मुँह में जाकर इन्होंने दूसरों को बचाया।

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इस बार का राष्ट्रीय वीरता पुरष्कार 18 बच्चों को 26 जनवरी के मौके पर दिया जायेगा। इनमें 3 बच्चे तो ऐसे हैं जिन्हें यह पुरष्कार मरणोपरांत दिया जायेगा।

इन जांबाज बच्चों में सात लड़कियां और 11 लड़के हैं। पुरस्कार 24 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रदान करेंगे। पुरस्कृत बच्चे खुली जीप में सवार होकर 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होगें।

धमकियों की परवाह ना करते हुए आगरा जिले के मंटोला इलाके में सट्टे और जुए के अवैध व्यवसाय के खिलाफ आवाज उठाने वाली नाजिया को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कारों के सर्वोच्च सम्मान ‘भारत पुरस्कार’ से नवाजा जाएगा। वहीं प्रतिष्ठित गीता चोपड़ा पुरस्कार कनार्टक की रहने वाली 14 साल की नेत्रावती एम चाव्हान को मरणोपरांत दिया जाएगा। उन्होंने दो डूबते हुए बच्चों को बचाते हुए अपनी जान की कुर्बानी दे दी थी।

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‘संजय चोपड़ा पुरस्कार’ साढ़े सत्रह साल के मास्टर करनबीर सिंह को दिया जाएगा, बच्चों से भरी स्कूल की बस अटारी गांव के पास एक पुल को पार करते दीवार से टकराकर नाले में जा गिरी, कुछ ही देर में बस पानी से भर गई जिसके कारण सभी बच्चें घबरा गए, पंजाब के करनबीर सिंह ने बस का दरवाजा तोड़कर 15 बच्चों को बचाया।

मेघालय के 14 साल के मास्टर बेटसवजॉन पेनलांग, ओडिशा की 7.5 साल की ममता दलाई और केरल के साढ़े 13 साल के मास्टर सेबेस्टियन को बापू ‘गैधानी पुरस्कार’ से नवाजा जाएगा। 14 साल के बेटसवजॉन ने अपने भाई के जिंदा जलने से बचाया था। वहीं सेबेस्टियन ने अपने एक दोस्त को रेल की पटरी के चपेट में आने से और ममता ने अपने दोस्त को मगरमच्छ के जबड़े से बचाया था।

इसके अलावा स्वयं के यौन शोषण के प्रयास को बहादुरी से विफल करने वाली छत्तीसगढ़ के रायपुर की लक्ष्मी यादव 16, और तेंदुए के हमले से अपनी मां की जान बचाने वाले उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल के पंकज सेमवाल 16, को भी राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

पुरस्कार पाने वाले अन्य बहादुर बच्चे नगालैंड निवासी कुमारी मनशा एन 13, 18 वर्षीय मास्टर एन शेंगपॉन कोनयक, मास्टर योकनेई और चिंगई वांग्सा, गुजरात की समृद्धि सुशील शर्मा 17, मिजोरम के जानुनतुआंगा 16, महाराष्ट्र के 17 वर्षीय नदाफ इजाज अब्दुल रॉफ, मणिपुर के लोकराकपाम राजेश्वरी चनु 14, मिजोरम के 18 वर्षीय एफ ललछंदामा और ओडिशा के 14 वर्षीय पंकज कुमार महंत हैं।

यह वीरता पुरस्कार 6 से 18 साल की उम्र के बच्चों को हर साल दिया जाता है, इन सभी पुरस्कारों का चयन एक उच्चस्तरीय समिति करती है, जिसमें विभिन्न मंत्रालय, विभागों के साथ NGO और भारतीय बाल कल्याण विभाग के अधिकारी शामिल रहते हैं।

सभी बहादुर बच्चों को नकद राशि, प्रशस्ति पत्र और मेडल प्रदान किया जाएगा। सभी की पूरी शिक्षा दीक्षा का खर्च भी परिषद द्वारा वहन किया जाएगा। नकद राशि के तहत भारत अवार्ड में 50 हजार रुपये, गीता और संजय चोपड़ा अवार्ड में 40-40 हजार रुपये, बापू गयाधनी अवार्ड में 24 हजार रुपये जबकि अन्य पुरस्कारों में 20-20 हजार रुपये प्रदान किए जाएंगे।

सबसे पहले 1957 में 2 बच्चों को बहादुरी के लिए वीरता पुरस्कार दिया गया था। तब से हर साल राष्ट्रीय पुरस्कार बच्चों को दिया जाता है।

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